Surat-Ul-Anaam | अल-अनआम
بِسۡمِ اللّٰہِ الرَّحۡمٰنِ الرَّحِیۡمِ
शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है, बहुत मेहरबान है।
In the name of Allah, the Most Gracious, the Most Merciful.
अल-अनआम : 1 - प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने
आकाशों और धरती को पैदा किया और अँधरों और उजाले का विधान किया; फिर
भी इनकार करनेवाले लोग दूसरों को अपने रब के समकक्ष ठहराते है
Al-Anaam: 1 - Praise be to Allah,
who created the heavens and the earth, and ordained the darkness and the light;
yet the unbelievers ascribe to others as equals to their Lord.
अल-अनआम : 2 - वही है जिसने तुम्हें मिट्टी
से पैदा किया, फिर (जीवन की) एक अवधि निश्चित
कर दी और उसके यहाँ (क़ियामत की) एक अवधि और निश्चित है; फिर
भी तुम संदेह करते हो!
Al-Anaam: 2 - It is He Who has created you from clay, then appointed a term (for life), and with Him is another term (for the Doomsday); yet you doubt.
अल-अनआम : 3 - वही अल्लाह है, आकाशों
में भी और धरती में भी। वह तुम्हारी छिपी और तुम्हारी खुली बातों को जानता है, और
जो कुछ तुम कमाते हो, वह उससे भी अवगत है
Al-Anaam: 3 - He is Allah, in the heavens and on the earth. He knows your secrets and your open deeds, and He is aware of what you earn.
अल-अनआम : 4 - हाल यह है कि उनके रब की
निशानियों में से कोई निशानी भी उनके पास ऐसी नहीं आई, जिससे
उन्होंने मुँह न मोड़ लिया हो
Al-Anaam: 4 - No sign from their Lord ever came to them that they did not turn away from
अल-अनआम : 5 - उन्होंने सत्य को झुठला दिया, जबकि
वह उनके पास आया। अतः जिस चीज़ को वे हँसी उड़ाते रहे हैं, जल्द
ही उसके सम्बन्ध में उन्हें ख़बरे मिल जाएगी
Al-Anaam: 5 - They rejected the Truth when it came to them. So, they will soon receive news of that which they used to laugh at.
अल-अनआम : 6 - क्या उन्होंने नहीं देखा कि
उनसे पहले कितने ही गिरोहों को हम विनष्ट कर चुके है। उन्हें हमने धरती में ऐसा
जमाव प्रदान किया था, जो तुम्हें नहीं प्रदान किया। और
उनपर हमने आकाश को ख़ूब बरसता छोड़ दिया और उनके नीचे नहरें बहाई। फिर हमने आकाश
को ख़ूब बरसता छोड़ दिया और उनके नीचे नहरें बहाई। फिर हमने उन्हें उनके गुनाहों
के कारण विनष्ट़ कर दिया और उनके पश्चात दूसरे गिरोहों को उठाया
Al-Anaam: 6 - Have they not seen how many groups We destroyed before them? We settled them on the earth in a way that We did not give you. And We poured down abundant rain from the sky upon them and made rivers flow beneath them. Then We poured down abundant rain from the sky and made rivers flow beneath them. Then We destroyed them because of their sins and raised up other groups after them.
अल-अनआम : 7 - और यदि हम तुम्हारे ऊपर काग़ज़
में लिखी-लिखाई किताब भी उतार देते और उसे लोग अपने हाथों से छू भी लेते तब भी, जिन्होंने
इनकार किया है, वे यही कहते, "यह
तो बस एक खुला जादू हैं।"
Al-Anaam: 7 - And even if We were to send down to you a written Book on paper and people were to touch it with their hands, those who disbelieve would still say: " This is nothing but open magic."
अल-अनआम : 8 - उनका तो कहना है, "इस
(नबी) पर कोई फ़रिश्ता (खुले रूप में) क्यों नहीं उतारा गया?" हालाँकि
यदि हम फ़रिश्ता उतारते तो फ़ैसला हो चुका होता। फिर उन्हें कोई मुहल्लत न मिलती
Al-Anaam: 8 - They say, " Why was no angel sent down to him (the Prophet) in the clear form?" Although if We had sent down an angel, the decision would have been decided. Then they would not have got any respite.
अल-अनआम : 9 - यह बात भी है कि यदि हम उसे
(नबी को) फ़रिश्ता बना देते तो उसे आदमी ही (के रूप का) बनाते। इस प्रकार उन्हें
उसी सन्देह में डाल देते, जिस सन्देह में वे इस समय पड़े
हुए है
Al-Anaam: 9 - Had We made him an angel, we would have made him a man, thus putting them in the same doubt that they are in now.
अल-अनआम : 10 - तुमसे पहले कितने ही रसूलों
की हँसी उड़ाई जा चुकी है। अन्ततः जिन लोगों ने उनकी हँसी उड़ाई थी, उन्हें
उसी न आ घेरा जिस बात पर वे हँसी उड़ाते थे
Al-Anaam: 10 - How many messengers have been ridiculed before you? Ultimately those who ridiculed them were surrounded by the same thing they used to ridicule
अल-अनआम : 11 - कहो, "धरती
में चल-फिरकर देखो कि झुठलानेवालों का क्या परिणाम हुआ!"
Al-Anaam: 11 - Say: " Travelate the earth and see what is the end of those who deny."
अल-अनआम : 12 - कहो, "आकाशों
और धरती में जो कुछ है किसका है?" कह दो, "अल्लाह
ही का है।" उसने दयालुता को अपने ऊपर अनिवार्य कर दिया है। निश्चय ही वह
तुम्हें क़ियामत के दिन इकट्ठा करेगा, इसमें कोई सन्देह नहीं है। जिन
लोगों ने अपने-आपको घाटे में डाला है, वही है जो ईमान नहीं लाते
Al-Anaam: 12 - Say, " To whom does all that is in the heavens and the earth belong?" Say, " To Allah." He has made mercy obligatory upon Himself. He will certainly gather you on the Day of Resurrection, there is no doubt about it. Those who have made themselves losers are the ones who do not believe.
अल-अनआम : 13 - हाँ, उसी
का है जो भी रात में ठहरता है और दिन में (गतिशील होता है), और
वह सब कुछ सुनता, जानता है
Al-Anaam: 13 - Yes, to Him belongs whoever stays at night and (moves) during the day, and He is All-Hearing, All-Knowing.
अल-अनआम : 14 - कहो, "क्या
मैं आकाशों और धरती को पैदा करनेवाले अल्लाह के सिवा किसी और को संरक्षक बना लूँ? उसका
हाल यह है कि वह खिलाता है और स्वयं नहीं खाता।" कहो, "मुझे
आदेश हुआ है कि सबसे पहले मैं उसके आगे झुक जाऊँ। और (यह कि) तुम बहुदेववादियों
में कदापि सम्मिलित न होना।"
Al-Anaam: 14 - Say: " Shall I take as my guardian any other than Allah, the Creator of the heavens and the earth? He is the one who provides and does not eat." Say: " I am commanded to be the first to bow down before Him. And never be among the polytheists."
अल-अनआम : 15 - कहो, "यदि
मैं अपने रब की अवज्ञा करूँ, तो उस स्थिति में मुझे एक बड़े
(भयानक) दिन की यातना का डर है।"
Al-Anaam: 15 - Say: " If I disobey my Lord, I fear the punishment of a great (terrible) day."
अल-अनआम : 16 - उस दिन वह जिसपर से टल गई, उसपर
अल्लाह ने दया की, और यही स्पष्ट सफलता है
Al-Anaam: 16 - Whoever is averted from it on that Day, Allah has mercy on him, and that is the clear success.
अल-अनआम : 17 - और यदि अल्लाह तुम्हें कोई
कष्ट पहुँचाए तो उसके अतिरिक्त उसे कोई दूर करनेवाला नहीं है और यदि वह तुम्हें
कोई भलाई पहुँचाए तो उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है
Al-Anaam: 17 - And if Allah causes you any evil, no one can remove it except Him. And if He causes you any good, then He is all-powerful.
अल-अनआम : 18 - उसे अपने बन्दों पर पूर्ण
अधिकार प्राप्त है। और वह तत्वदर्शी, ख़बर रखनेवाला है
Al-Anaam: 18 - He has full authority over His servants. And He is the Wise and the Aware
अल-अनआम : 19 - कहो, "किस
चीज़ की गवाही सबसे बड़ी है?" कहो, "मेरे
और तुम्हारे बीच अल्लाह गवाह है। और यह क़ुरआन मेरी ओर वह्यी (प्रकाशना) किया गया
है,
ताकि मैं इसके द्वारा तुम्हें सचेत कर दूँ।
और जिस किसी को यह अल्लाह के साथ दूसरे पूज्य भी है?" तुम
कह दो,
"मैं तो इसकी गवाही नहीं देता।" कह दो, "वह
तो बस अकेला पूज्य है। और तुम जो उसका साझी ठहराते हो, उससे
मेरा कोई सम्बन्ध नहीं।"
Al-Anaam: 19 - Say: " What has the greatest testimony?" Say: " Allah is a witness between me and you. This Qur'an has been revealed to me so that I may warn you by it. And who has it? Say: " I do not bear witness to that." Say: " He is the only God. And I have no connection with whatever you associate with Him. "
अल-अनआम : 20 - जिन लोगों को हमने किताब दी
है,
वे उसे इस प्रकार पहचानते है, जिस
प्रकार अपने बेटों को पहचानते है। जिन लोगों ने अपने आपको घाटे में डाला है, वही
ईमान नहीं लाते
Al-Anaam: 20 - Those to whom We have given the Book recognize it as they recognize their own sons. Those who have put themselves in loss are the ones who do not believe.
अल-अनआम : 21 - और उससे बढ़कर अत्याचारी कौन
होगा,
जो अल्लाह पर झूठ गढ़े या उसकी आयतों को
झुठलाए। निस्सन्देह अत्याचारी कभी सफल नहीं हो सकते
Al-Anaam: 21 - And who is more unjust than the one who fabricates a lie against Allah or rejects His verses? Indeed, the unjust will never succeed
अल-अनआम : 22 - और उस दिन को याद करो जब हम
सबको इकट्ठा करेंगे; फिर बहुदेववादियों से पूछेंगे, "कहाँ
है तुम्हारे ठहराए हुए साझीदार, जिनका तुम दावा किया करते थे?"
Al-Anaam: 22 - And remember the Day when We will gather them all; and We will ask the polytheists: " Where are your appointed partners, whom you used to claim?"
अल-अनआम : 23 - फिर उनका कोई फ़िला (उपद्रव)
शेष न रहेगा। सिवाय इसके कि वे कहेंगे, "अपने रब
अल्लाह की सौगन्ध! हम बहुदेववादी न थे।"
Al-Anaam: 23 - Then they will not have any trouble except that they will say: " By our Lord Allah, we were not polytheists."
अल-अनआम : 24 - देखो, कैसा
वे अपने विषय में झूठ बोले। और वह गुम होकर रह गया जो वे घड़ा करते थे
Al-Anaam: 24 - Look how they lied about themselves. And what they used to fabricate vanished.
अल-अनआम : 25 - और उनमें कुछ लोग ऐसे है जो
तुम्हारी ओर कान लगाते है, हालाँकि हमने तो उनके दिलों पर
परदे डाल रखे है कि वे उसे समझ न सकें और उनके कानों में बोझ डाल दिया है। और वे
चाहे प्रत्येक निशानी देख लें तब भी उसे मानेंगे नहीं; यहाँ
तक कि जब वे तुम्हारे पास आकर तुमसे झगड़ते है, तो
अविश्वास की नीति अपनानेवाले कहते है, "यह तो बस
पहले को लोगों की गाथाएँ है।"
Al-Anaam: 25 - And among them are some who listen to you, although We have covered their hearts with veils so that they cannot understand and have filled their ears with burdens. And even if they see every sign, they will not believe in it, so much so that when they come to you and dispute with you, those who disbelieve say, " These are only stories of the past."
अल-अनआम : 26 - और वे उससे दूसरों को रोकते
है और स्वयं भी उससे दूर रहते है। वे तो बस अपने आपको ही विनष्ट कर रहे है, किन्तु
उन्हें इसका एहसास नहीं
Al-Anaam: 26 - And they forbid others from it and themselves also stay away from it. They are only destroying themselves, but they do not realize it
अल-अनआम : 27 - और यदि तुम उस समय देख सकते, जब
वे आग के निकट खड़े किए जाएँगे और कहेंगे, "काश! क्या
ही अच्छा होता कि हम फिर लौटा दिए जाएँ (कि माने) और अपने रब की आयतों को न
झुठलाएँ और माननेवालों में हो जाएँ।"
Al-Anaam: 27 - And if you could see when they will be made to stand near the Fire, and they will say: " If only we were sent back and we would not reject the verses of our Lord and be among those who believe."
अल-अनआम : 28 - कुछ नहीं, बल्कि
जो कुछ वे पहले छिपाया करते थे, वह उनके सामने आ गया। और यदि वे
लौटा भी दिए जाएँ, तो फिर वही कुछ करने लगेंगे
जिससे उन्हें रोका गया था। निश्चय ही वे झूठे है
Al-Anaam: 28 - Nothing, but what they used to hide has come to light. And if they are sent back, they will again do what they were forbidden from. They are certainly liars.
अल-अनआम : 29 - और वे कहते है, "जो
कुछ है बस यही हमारा सांसारिक जीवन है; हम कोई फिर उठाए जानेवाले नहीं
हैं।"
Al-Anaam: 29 - And they say: " This is our worldly life; we are not going to be raised up again."
अल-अनआम : 30 - और यदि तुम देख सकते जब वे
अपने रब के सामने खड़े किेए जाएँगे! वह कहेगा, "क्या
यह यर्थाथ नहीं है?" कहेंगे, "क्यों
नही,
हमारे रब की क़सम!" वह कहेगा, "अच्छा
तो उस इनकार के बदले जो तुम करते रहें हो, यातना का
मज़ा चखो।"
Al-Anaam: 30 - And if you could only see when they will be brought before their Lord, He will say: " Is this not the truth?" They will say: " By our Lord, why not?" He will say: " Then taste the punishment in return for the denial you used to do. "
अल-अनआम : 31 - वे लोग घाटे में पड़े, जिन्होंने
अल्लाह से मिलने को झुठलाया, यहाँ तक कि जब अचानक उनपर वह
घड़ी आ जाएगी तो वे कहेंगे, "हाय!
अफ़सोस,
उस कोताही पर जो इसके विषय में हमसे
हुई।" और हाल यह होगा कि वे अपने बोझ अपनी पीठों पर उठाए होंगे। देखो, कितना
बुरा बोझ है जो ये उठाए हुए है!
Al-Anaam: 31 - Those who denied the meeting of Allah will be at a loss until, when the Hour comes upon them, they will say: " Alas! Alas for the negligence which we have shown in this regard." They will be carrying their burdens on their backs. Look at the wretched burden they are carrying!
अल-अनआम : 32 - सांसारिक जीवन तो एक खेल और
तमाशे (ग़फलत) के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है जबकि आख़िरत का घर उन लोगों के लिए
अच्छा है, जो डर रखते है। तो क्या तुम
बुद्धि से काम नहीं लेते?
Al-Anaam: 32 - The worldly life is nothing but a game and a show (negligence), whereas the abode of the Hereafter is better for those who fear. So do you not use your intelligence?
अल-अनआम : 33 - हमें मालूम है, जो
कुछ वे कहते है उससे तुम्हें दुख पहुँचता है। तो वे वास्तव में तुम्हें नहीं
झुठलाते,
बल्कि उन अत्याचारियो को तो अल्लाह की आयतों
से इनकार है
Al-Anaam: 33 - We know that what they say hurts you. But they are not really denying you, but those unjust people deny the verses of Allah.
अल-अनआम : 34 - तुमसे पहले भी बहुत-से रसूल
झुठलाए जा चुके है, तो वे अपने झुठलाए जाने और कष्ट
पहुँचाए जाने पर धैर्य से काम लेते रहे, यहाँ तक कि उन्हें हमारी सहायता
पहुँच गई। कोई नहीं जो अल्लाह की बातों को बदल सके। तुम्हारे पास तो रसूलों की कुछ
ख़बरें पहुँच ही चुकी है
Al-Anaam: 34 - Many messengers have been rejected before you, but they remained patient when they were rejected and were oppressed, until Our help reached them. There is no one who can change the words of Allah. Some news of the messengers has already reached you.
अल-अनआम : 35 - और यदि उनकी विमुखता तुम्हारे
लिए असहनीय है, तो यदि तुमसे हो सके कि धरती में
कोई सुरंग या आकाश में कोई सीढ़ी ढूँढ़ निकालो और उनके पास कोई निशानी ले आओ, तो
(ऐसा कर देखो), यदि अल्लाह चाहता तो उन सबको
सीधे मार्ग पर इकट्ठा कर देता। अतः तुम उजड्ड और नादान न बनना
Al-Anaam: 35 - And if their deviation is intolerable to you, then if you can find a tunnel in the earth or a ladder in the sky and bring them a sign, then (try doing that). Had Allah willed, He would have brought them all together on the straight path. So do not be foolish and ignorant.
अल-अनआम : 36 - मानते हो वही लोग है जो सुनते
है,
रहे मुर्दे, तो
अल्लाह उन्हें (क़ियामत के दिन) उठा खड़ा करेगा; फिर
वे उसी के ओर पलटेंगे
Al-Anaam: 36 - Those who believe are those who listen. As for the dead, Allah will raise them up; then to Him they will return.
अल-अनआम : 37 - वे यह भी कहते है, "उस
(नबी) पर उसके रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई?" कह
दो,
"अल्लाह को तो इसकी सामर्थ्य प्राप्त है कि
कोई निशानी उतार दे; परन्तु उनमें से अधिकतर लोग नहीं
जानते।"
Al-Anaam: 37 - They also say: " Why has no sign been sent down to him from his Lord?" Say: " Allah is all-powerful to send down a sign, but most of them do not know."
अल-अनआम : 38 - धरती में चलने-फिरनेवाला कोई
भी प्राणी हो या अपने दो परो से उड़नवाला कोई पक्षी, ये
सब तुम्हारी ही तरह के गिरोह है। हमने किताब में कोई भी चीज़ नहीं छोड़ी है। फिर
वे अपने रब की ओर इकट्ठे किए जाएँगे
Al-Anaam: 38 - Any creature that moves on the earth or any bird that flies with its two wings, they are all groups like you. We have not left out anything in the Book. Then they will be gathered towards their Lord
अल-अनआम : 39 - जिन लोगों ने हमारी आयतों को
झुठलाया,
वे बहरे और गूँगे है, अँधेरों
में पड़े हुए हैं। अल्लाह जिसे चाहे भटकने दे और जिसे चाहे सीधे मार्ग पर लगा दे
Al-Anaam: 39 - Those who rejected Our verses are deaf and dumb, lying-in darkness. Allah lets go astray whom He wills and guides whom He wills to the right path.
अल-अनआम : 40 - कहो, "क्या
तुमने यह भी सोचा कि यदि तुमपर अल्लाह की यातना आ पड़े या वह घड़ी तुम्हारे सामने
आ जाए,
तो क्या अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारोगे? बोलो, यदि
तुम सच्चे हो?
Al-Anaam: 40 - Say: " Have you ever considered that if the punishment of Allah befalls you or that the Hour comes before you, will you call upon anyone other than Allah? Say, if you are truthful?
अल-अनआम : 41 - "बल्कि तुम उसी को
पुकारते हो - फिर जिसके लिए तुम उसे पुकारते हो, वह
चाहता है तो उसे दूर कर देता है - और उन्हें भूल जाते हो जिन्हें साझीदार ठहराते
हो।"
Al-Anaam: 41 - "Rather, you call upon Him - then He removes the one for whom you call, if He wills - and you forget those whom you associate with Him."
अल-अनआम : 42 - तुमसे पहले कितने ही समुदायों
की ओर हमने रसूल भेजे कि उन्हें तंगियों और मुसीबतों में डाला, ताकि
वे विनम्र हों
Al-Anaam: 42 - To how many communities before you have, we sent Messengers, and afflicted them with hardships and difficulties, that they may become humble?
अल-अनआम : 43 - जब हमारी ओर से उनपर सख्ती आई
तो फिर क्यों न विनम्र हुए? परन्तु उनके हृदय तो कठोर हो गए
थे और जो कुछ वे करते थे शैतान ने उसे उनके लिए मोहक बना दिया
Al-Anaam: 43 - Why did they not become humble when We punished them? But their hearts had hardened and Satan made whatever they did tempting for them.
अल-अनआम : 44 - फिर जब उसे उन्होंने भुला
दिया जो उन्हें याद दिलाई गई थी, तो हमने उनपर हर चीज़ के दरवाज़े
खोल दिए;
यहाँ तक कि जो कुछ उन्हें मिला था, जब
वे उसमें मग्न हो गए तो अचानक हमने उन्हें पकड़ लिया, तो
क्या देखते है कि वे बिल्कुल निराश होकर रह गए
Al-Anaam: 44 - Then when they forgot what they had been reminded of, we opened to them the doors of everything, until they became absorbed in what they had found, and suddenly We seized them: so, they were utterly disheartened.
अल-अनआम : 45 - इस प्रकार अत्याचारी लोगों की
जड़ काटकर रख दी गई। प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जो
सारे संसार का रब है
Al-Anaam: 45 - Thus were the oppressors cut off from their roots. All praise is for Allah, the Lord of the worlds
अल-अनआम : 46 - कहो, "क्या
तुमने यह भी सोचा कि यदि अल्लाह तुम्हारे सुनने की और तुम्हारी देखने की शक्ति छीन
ले और तुम्हारे दिलों पर ठप्पा लगा दे, तो अल्लाह के सिवा कौन पूज्य है
जो तुम्हें ये चीज़े लाकर दे?" देखो, किस
प्रकार हम तरह-तरह से अपनी निशानियाँ बयान करते है! फिर भी वे किनारा ही खींचते
जाते है
Al-Anaam: 46 - Say: " Have you considered: If Allah takes away, you’re hearing and your sight and seals your hearts, who is godly except Allah who will bring you these things?" See how We explain Our signs in various ways! Yet they go on drawing the shore
अल-अनआम : 47 - कहो, "क्या
तुमने यह भी सोचा कि यदि तुमपर अचानक या प्रत्यक्षतः अल्लाह की यातना आ जाए, तो
क्या अत्याचारी लोगों के सिवा कोई और विनष्ट होगा?"
Al-Anaam: 47 - Say: " Have you ever considered that if the chastisement of Allah comes upon you suddenly and evidently, will anyone perishes except the unjust people?"
अल-अनआम : 48 - हम रसूलों को केवल शुभ-सूचना
देनेवाले और सचेतकर्ता बनाकर भेजते रहे है। फिर जो ईमान लाए और सुधर जाए, तो
ऐसे लोगों के लिए न कोई भय है और न वे कभी दुखी होंगे
Al-Anaam: 48 - We have sent the messengers only as bearers of good news and cautioners. Then whoever believes and reforms, there is no fear for them, nor will they grieve.
अल-अनआम : 49 - रहे वे लोग, जिन्होंने
हमारी आयतों को झुठलाया, उन्हें यातना पहुँचकर रहेगी, क्योंकि
वे अवज्ञा करते रहे है
Al-Anaam: 49 - As for those who rejected Our verses, they will surely be tormented because they continued to disobey.
अल-अनआम : 50 - कह दो, "मैं
तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने है, और
न मैं परोक्ष का ज्ञान रखता हूँ, और न मैं तुमसे कहता हूँ कि मैं
कोई फ़रिश्ता हूँ। मैं तो बस उसी का अनुपालन करता हूँ जो मेरी ओर वह्यं की जाती
है।" कहो, "क्या अंधा और आँखोंवाला दोनों
बराबर हो जाएँगे? क्या तुम सोच-विचार से काम नहीं
लेते?"
Al-Anaam: 50 - Say: " I do not tell you that I have the treasures of Allah, nor that I have knowledge of the unseen, nor do I tell you that I am an angel. I only follow what is revealed to me." Say: " Will the blind and the sighted be equal? Do you not think?"
अल-अनआम : 51 - और तुम इसके द्वारा उन लोगों
को सचेत कर दो, जिन्हें इस बात का भय है कि वे
अपने रब के पास इस हाल में इकट्ठा किए जाएँगे कि उसके सिवा न तो उसका कोई समर्थक
होगा और न कोई सिफ़ारिश करनेवाला, ताकि वे बचें
Al-Anaam: 51 - And warn thereby those who fear that they will be gathered before their Lord in a state where they will have neither supporter nor intercessor except Him, so that they may be saved.
अल-अनआम : 52 - और जो लोग अपने रब को उसकी
ख़ुशी की चाह में प्रातः और सायंकाल पुकारते रहते है, ऐसे
लोगों को दूर न करना। उनके हिसाब की तुमपर कुछ भी ज़िम्मेदारी नहीं है और न
तुम्हारे हिसाब की उनपर कोई ज़िम्मेदारी है कि तुम उन्हें दूर करो और फिर हो जाओ
अत्याचारियों में से
Al-Anaam: 52 - And do not turn away those who call upon their Lord in the morning and evening seeking His pleasure. You have no responsibility for their account nor do they have any responsibility for your account so that you turn away from them. Then you will be among the unjust.
अल-अनआम : 53 - और इसी प्रकार हमने इनमें से
एक को दूसरे के द्वारा आज़माइश में डाला, ताकि वे
कहें,
"क्या यही वे लोग है, जिनपर
अल्लाह न हममें से चुनकर एहसान किया है ?" - क्या
अल्लाह कृतज्ञ लोगों से भली-भाँति परिचित नहीं है?
Al-Anaam: 53 - And thus We test one of them by another, so that they may say: " Are these the ones on whom Allah has not bestowed favour by choosing from among us?" - Is not Allah well aware of those who are grateful?
अल-अनआम : 54 - और जब तुम्हारे पास वे लोग
आएँ,
जो हमारी आयतों को मानते है, तो
कहो,
"सलाम हो तुमपर! तुम्हारे रब ने दयालुता को
अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है कि तुममें से जो कोई नासमझी से कोई बुराई कर बैठे, फिर
उसके बाद पलट आए और अपना सुधार कर तो यह है वह बड़ा क्षमाशील, दयावान
है।"
Al-Anaam: 54 - And when there come to you those who believe in Our verses, say: " Peace be upon you! Your Lord has made mercy obligatory upon Himself: whoever of you commits an evil act without knowledge, and then turns back and reforms himself, then He is Most Forgiving, Most Merciful."
अल-अनआम : 55 - इसी प्रकार हम अपनी आयतें
खोल-खोलकर बयान करते है (ताकि तुम हर ज़रूरी बात जान लो) और इसलिए कि अपराधियों का
मार्ग स्पष्ट हो जाए
Al-Anaam: 55 - Thus do We explain Our verses in detail (so that you may know the essentials) and so that the path of the criminals may become clear.
अल-अनआम : 56 - कह दो, "तुम
लोग अल्लाह से हटकर जिन्हें पुकारते हो, उनकी बन्दगी करने से मुझे रोका
गया है।" कहो, "मैं तुम्हारी इच्छाओं का अनुपालन
नहीं करता, क्योंकि तब तो मैं मार्ग से भटक
गया और मार्ग पानेवालों में से न रहा।"
Al-Anaam: 56 - Say: " I am forbidden from worshipping those whom you call upon besides Allah. " Say: " I do not follow your desires, for then I have strayed from the right path and am no longer among the guided ones."
अल-अनआम : 57 - कह दो, "मैं
अपने रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर क़ायम हूँ और तुमने उसे झुठला दिया है। जिस
चीज़ के लिए तुम जल्दी मचा रहे हो, वह कोई मेरे पास तो नहीं है।
निर्णय का सारा अधिकार अल्लाह ही को है, वही सच्ची बात बयान करता है और
वही सबसे अच्छा निर्णायक है।"
Al-Anaam: 57 - Say: " I stand by clear evidence from my Lord, and you have rejected it. I do not have that which you are in a hurry to judge. Allah alone has the power to judge; He declares the truth and He is the best of judges."
अल-अनआम : 58 - कह दो, "जिस
चीज़ की तुम्हें जल्दी पड़ी हुई है, यदि कहीं वह चीज़ मेरे पास होती
तो मेरे और तुम्हारे बीच कभी का फ़ैसला हो चुका होता। और अल्लाह अत्याचारियों को
भली-भाती जानता है।"
Al-Anaam: 58 - Say: " If I had that which you are in such a hurry for, the decision between me and you would have been made long ago. And God is well aware of the unjust."
अल-अनआम : 59 - उसी के पास परोक्ष की कुंजियाँ
है,
जिन्हें उसके सिवा कोई नहीं जानता। जल और थल
में जो कुछ है, उसे वह जानता है। और जो पत्ता भी
गिरता है, उसे वह निश्चय ही जानता है। और
धरती के अँधेरों में कोई दाना हो और कोई भी आर्द्र (गीली) और शुष्क (सूखी) चीज़ हो, निश्चय
ही एक स्पष्ट किताब में मौजूद है
Al-Anaam: 59 - With Him are the keys of the unseen, which no one knows except Him. He knows all that is in the sea and on the land. And He knows every leaf that falls. And whatever grain is in the darkness of the earth, and whatever is wet and dry, is certainly present in a clear Book.
अल-अनआम : 60 - और वही है जो रात को तुम्हें
मौत देता है और दिन में जो कुछ तुमने किया उसे जानता है। फिर वह इसलिए तुम्हें
उठाता है, ताकि निश्चित अवधि पूरा हो जाए; फिर
उसी की ओर तुम्हें लौटना है, फिर वह तुम्हें बता देगा जो कुछ
तुम करते रहे हो
Al-Anaam: 60 - And He is the One Who causes you to die at night and knows what you did during the day. Then He raises you up so that a specified period may be completed; then to Him you will return, and He will inform you of what you used to do.
अल-अनआम : 61 - और वही अपने बन्दों पर
पूरा-पूरा क़ाबू रखनेवाला है और वह तुमपर निगरानी करनेवाले को नियुक्त करके भेजता
है,
यहाँ तक कि जब तुममें से किसी की मृत्यु आ
जाती है,
जो हमारे भेजे हुए कार्यकर्त्ता उसे अपने
क़ब्ज़े में कर लेते है और वे कोई कोताही नहीं करते
Al-Anaam: 61 - And He is the All-Powerful over His servants and He sends overseers over you until, when death approaches one of you, our sent overseers take charge of him and they do not slacken in doing so.
अल-अनआम : 62 - फिर सब अल्लाह की ओर, जो
उसका वास्तविक स्वामी है, लौट जाएँगे। जान लो, निर्णय
का अधिकार उसी को है और वह बहुत जल्द हिसाब लेनेवाला है
Al-Anaam: 62 - Then all will return to Allah, their true Lord. Know that the judgement is His and He is the swiftest of judges
अल-अनआम : 63 - कहो, "कौन
है जो थल और जल के अँधेरो से तुम्हे छुटकारा देता है, जिसे
तुम गिड़गिड़ाते हुए और चुपके-चुपके पुकारने लगते हो कि यदि हमें इससे बचा लिया तो
हम अवश्य की कृतज्ञ हो जाएँगे?"
Al-Anaam: 63 - Say: " Who is it that delivers you from the darkness of land and sea, to whom you cry in supplication and secretly saying, 'If He saves us from this, we will surely be grateful?'"
अल-अनआम : 64 - कहो, "अल्लाह
तुम्हें इनसे और हरके बेचैनी और पीड़ा से छुटकारा देता है, लेकिन
फिर तुम उसका साझीदार ठहराने लगते हो।"
Al-Anaam: 64 - Say: " Allah frees you from these and from all kinds of discomfort and pain, but you associate partners with Him."
अल-अनआम : 65 - कहो, "वह
इसकी सामर्थ्य रखता है कि तुमपर तुम्हारे ऊपर से या तुम्हारे पैरों के नीचे से कोई
यातना भेज दे या तुम्हें टोलियों में बाँटकर परस्पर भिड़ा दे और एक को दूसरे की
लड़ाई का मज़ा चखाए।" देखो, हम आयतों को कैसे, तरह-तरह
से,
बयान करते है, ताकि
वे समझे
Al-Anaam: 65 - Say: " He is all-powerful to send down upon you a chastisement from above or from beneath your feet, or to divide you into groups and make you fight against one another, and make one taste the other's battle." See how We explain the verses in various ways, so that they may understand.
अल-अनआम : 66 - तुम्हारी क़ौम ने तो उसे
झुठला दिया, हालाँकि वह सत्य है। कह दो, मैं
"तुमपर कोई संरक्षक नियुक्त नहीं हूँ
Al-Anaam: 66 - Your people rejected it, although it is the truth. Say: I am not a guardian over you.
अल-अनआम : 67 - "हर ख़बर का एक निश्चित
समय है और शीघ्र ही तुम्हें ज्ञात हो जाएगा।"
Al-Anaam: 67 - "Every news has a designated time and soon it will be known to you."
अल-अनआम : 68 - और जब तुम उन लोगों को देखो, जो
हमारी आयतों पर नुक्ताचीनी करने में लगे हुए है, तो
उनसे मुँह फेर लो, ताकि वे किसी दूसरी बात में लग
जाएँ। और यदि कभी शैतान तुम्हें भुलावे में डाल दे, तो
याद आ जाने के बाद उन अत्याचारियों के पास न बैठो
Al-Anaam: 68 - And when you see those who are engaged in criticizing Our verses, then turn away from them so that they may engage themselves in some other talk. And if ever Satan misleads you, then do not sit with the unjust after you have remembered.
अल-अनआम : 69 - उनके हिसाब के प्रति तो उन
लोगो पर कुछ भी ज़िम्मेदारी नहीं, जो डर रखते है। यदि है तो बस याद
दिलाने की; ताकि वे डरें
Al-Anaam: 69 - Those who fear have no responsibility regarding their account. If they have, it is only a reminder; so that they fear.
अल-अनआम : 70 - छोड़ो उन लोगों को, जिन्होंने
अपने धर्म को खेल और तमाशा बना लिया है और उन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल
रखा है। और इसके द्वारा उन्हें नसीहत करते रहो कि कहीं ऐसा न हो कि कोई अपनी कमाई
के कारण तबाही में पड़ जाए। अल्लाह से हटकर कोई भी नहीं, जो उसका
समर्थक और सिफ़ारिश करनेवाला हो सके और यदि वह छुटकारा पाने के लिए बदले के रूप
में हर सम्भव चीज़ देने लगे, तो भी वह उससे न लिया जाए। ऐसे
ही लोग है, जो अपनी कमाई के कारण तबाही में
पड गए। उनके लिए पीने को खौलता हुआ पानी है और दुखद यातना भी; क्योंकि
वे इनकार करते रहे थे
Al-Anaam: 70 - Leave aside those who have made their religion a game and a spectacle and have been deceived by the worldly life. And admonish them with this lest anyone fall into ruin because of his earnings. There is no one other than Allah, whoever can be his supporter and intercessor and even if he starts offering everything possible in exchange for his deliverance, it should not be taken from him. Such are the people who have fallen into destruction because of their earnings. For them there is boiling water to drink and painful punishment; because they kept on denying.
अल-अनआम : 71 - कहो, "क्या
हम अल्लाह को छोड़कर उसे पुकारने लग जाएँ जो न तो हमें लाभ पहुँचा सके और न हमें
हानि पहुँचा सके और हम उलटे पाँव फिर जाएँ, जबकि
अल्लाह ने हमें मार्ग पर लगा दिया है? - उस व्यक्ति
की तरह जिसे शैतानों ने धरती पर भटका दिया हो और वह हैरान होकर रह गया हो। उसके
कुछ साथी हो, जो उसे मार्ग की ओर बुला रहे हो
कि हमारे पास चला आ!" कह दो, "मार्गदर्शन
केवल अल्लाह का मार्गदर्शन है और हमें इसी बात का आदेश हुआ है कि हम सारे संसार के
स्वामी को समर्पित हो जाएँ।"
Al-Anaam: 71 - Say: " Shall we call upon other than Allah that which can neither benefit us nor harm us, and then turn back after Allah has guided us? Like a man who has been led astray on the earth by the devils and is bewildered, and he has companions who call him to the guidance, saying, 'Come to them!'" Say: " The guidance is only Allah's guidance, and we have been commanded to submit ourselves to the Lord of the worlds."
अल-अनआम : 72 - और यह कि "नमाज़ क़ायम
करो और उसका डर रखो। वही है, जिसके पास तुम इकट्ठे किए जाओगे,
Al-Anaam: 72 - And that "Establish the prayer and fear Him. It is He to whom you will be gathered.
अल-अनआम
: 73 - "और वही है जिसने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया। और
जिस समय वह किसी चीज़ को कहे, 'हो जा', तो
वह उसी समय वह हो जाती है। उसकी बात सर्वथा सत्य है और जिस दिन 'सूर' (नरसिंघा)
में फूँक मारी जाएगी, राज्य उसी का होगा। वह सभी छिपी
और खुली चीज़ का जाननेवाला है, और वही तत्वदर्शी, ख़बर
रखनेवाला है।"
Al-Anaam: 73 - "And He is the One Who created the heavens and the earth with truth. And when He says to a thing, ' Be, ' it becomes that very moment. His word is the truth. And the Day when the trumpet is blown, His will be the kingdom. He is the Knower of all that is hidden and manifest. He is the Wise, the Aware."
अल-अनआम : 74 - और याद करो, जब
इबराहीम ने अपने बाप आज़र से कहा था, "क्या तुम
मूर्तियों को पूज्य बनाते हो? मैं तो तुम्हें और तुम्हारी क़ौम
को खुली गुमराही में पड़ा देख रहा हूँ।"
Al-Anaam: 74 - And remember when Ibrahim said to his father Azar: " Do you worship idols? I see you and your people in clear error."
अल-अनआम : 75 - और इस प्रकार हम इबराहीम को
आकाशों और धरती का राज्य दिखाने लगे (ताकि उसके ज्ञान का विस्तार हो) और इसलिए कि
उसे विश्वास हो
Al-Anaam: 75 - And thus We showed to Ibrahim the kingdoms of the heavens and the earth (so that his knowledge might increase) and so that he might have faith
अल-अनआम : 76 - अतएवः जब रात उसपर छा गई, तो
उसने एक तारा देखा। उसने कहा, "इसे मेरा
रब ठहराते हो!" फिर जब वह छिप गया तो बोला, "छिप
जानेवालों से मैं प्रेम नहीं करता।"
Al-Anaam: 76 - So when night fell upon him, he saw a star. He said: " Do you consider this to be my Lord?" Then when it hid itself, he said: " I do not love those who hide themselves."
अल-अनआम : 77 - फिर जब उसने चाँद को चमकता
हुआ देखा, तो कहा, "इसको
मेरा रब ठहराते हो!" फिर जब वह छिप गया, तो कहा, "यदि
मेरा रब मुझे मार्ग न दिखाता तो मैं भी पथभ्रष्ट! लोगों में सम्मिलित हो
जाता।"
Al-Anaam: 77 - Then when he saw the
moon shining, he said: " You consider this to be my Lord." Then when
it hid, he said: " If my Lord had not guided me, I would have been among
the people who went astray."
अल-अनआम : 78 - फिर जब उसने सूर्य को चमकता
हुआ देखा, तो कहा, "इसे
मेरा रब ठहराते हो! यह तो बहुत बड़ा है।" फिर जब वह भी छिप गया, तो
कहा,
"ऐ मेरी क़ौन के लोगो! मैं विरक्त हूँ उनसे
जिनको तुम साझी ठहराते हो
Al-Anaam: 78 - Then when he saw the sun shining, he said, " You ascribe this to be my Lord! It is very great." Then when it also hid, he said, " O my people! I am disinterested in those whom you associate with Him
अल-अनआम : 79 - "मैंने तो एकाग्र होकर
अपना मुख उसकी ओर कर लिया है, जिसने आकाशों और धरती को पैदा
किया। और मैं साझी ठहरानेवालों में से नहीं।"
Al-Anaam: 79 - "I have turned my face towards Him who created the heavens and the earth, and I am not among those who associate partners. "
अल-अनआम : 80 - उसकी क़ौम के लोग उससे झगड़ने
लगे। उसने कहा, "क्या तुम मुझसे अल्लाह के विषय
में झगड़ते हो? जबकि उसने मुझे मार्ग दिखा दिया
है। मैं उनसे नहीं डरता, जिन्हें तुम उसका सहभागी ठहराते
हो,
बल्कि मेरा रब जो कुछ चाहता है वही पूरा होकर
रहता है। प्रत्येक वस्तु मेरे रब की ज्ञान-परिधि के भीतर है। फिर क्या तुम चेतोगे
नहीं?
Al-Anaam: 80 - His people started arguing with him. He said, " Do you argue with me about Allah when He has guided me. I do not fear those whom you associate with Him. But whatever my Lord wishes will happen. Everything is within the reach of my Lord's knowledge. Will you not then take heed?
अल-अनआम : 81 - "और मैं तुम्हारे ठहराए
हुए साझीदारो से कैसे डरूँ, जबकि तुम इस बात से नहीं डरते कि
तुमने उसे अल्लाह का सहभागी उस चीज़ को ठहराया है, जिसका
उसने तुमपर कोई प्रमाण अवतरित नहीं किया? अब दोनों
फ़रीकों में से कौन अधिक निश्चिन्त रहने का अधिकारी है? बताओ
यदि तुम जानते हो
Al-Anaam: 81 - "And how should I fear the partners you have set up, when you are not afraid of the fact that you have associated with Allah something for which He has not revealed any evidence to you? So, which of the two groups has the most right to be at peace? Tell me if you know."
अल-अनआम : 82 - "जो लोग ईमान लाए और
अपने ईमान में किसी (शिर्क) ज़ुल्म की मिलावट नहीं की, वही
लोग है जो भय मुक्त है और वही सीधे मार्ग पर हैं।"
Al-Anaam: 82 - "Those who believe and have not mixed their faith with any evil (shirk) are the ones who are free from fear and are on the right path."
अल-अनआम : 83 - यह है हमारा वह तर्क जो हमने
इबराहीम को उसकी अपनी क़ौम के मुक़ाबले में प्रदान किया था। हम जिसे चाहते है
दर्जों (श्रेणियों) में ऊँचा कर देते हैं। निस्संदेह तुम्हारा रब तत्वदर्शी, सर्वज्ञ
है
Al-Anaam: 83 - This is Our argument which We gave to Ibrahim against his people. We elevate whomever We wish in ranks. Surely your Lord is Wise, All-Wise.
अल-अनआम : 84 - और हमने उसे (इबराहीम को)
इसहाक़ और याक़ूब दिए; हर एक को मार्ग दिखाया - और नूह
को हमने इससे पहले मार्ग दिखाया था, और उसकी सन्तान में दाऊद, सुलैमान, अय्यूब, यूसुफ़, मूसा
और हारून को भी - और इस प्रकार हम शुभ-सुन्दर कर्म करनेवालों को बदला देते है –
Al-Anaam: 84 - And We gave him Isaac and Jacob; each one We guided - and Nuh We guided before him, and of his progeny Dawood, Solomon, Job, Yusuf, Moses and Haroon - and thus We reward those who do good deeds.
अल-अनआम : 85 - और ज़करिया, यह्या
, ईसा
और इलयास को भी (मार्ग दिखलाया) । इनमें का हर एक योग्य और नेक था
Al-Anaam: 85 - And He also guided Zakariya, Yahya, Isa and Ilyas. Every one of them was worthy and pious.
अल-अनआम : 86 - और इसमाईल, अलयसअ, यूनुस
और लूत को भी। इनमें से हर एक को हमने संसार के मुक़ाबले में श्रेष्ठता प्रदान की
Al-Anaam: 86 - And Ishmael, Al-Yasa, Yunus and Lut. To each of them We gave superiority over the worlds.
अल-अनआम : 87 - और उनके बाप-दादा और उनकी
सन्तान और उनके भाई-बन्धुओं में भी कितने ही लोगों को (मार्ग दिखाया) । और हमने
उन्हें चुन लिया और उन्हें सीधे मार्ग की ओर चलाया
Al-Anaam: 87 - And We have guided many of their fathers and their children and their kinsmen. And We chose them and guided them to the straight path.
अल-अनआम : 88 - यह अल्लाह का मार्गदर्शन है, जिसके
द्वारा वह अपने बन्दों में से जिसको चाहता है मार्ग दिखाता है, और
यदि उन लोगों ने कहीं अल्लाह का साझी ठहराया होता, तो
उनका सब किया-धरा अकारथ हो जाता
Al-Anaam: 88 - This is the guidance of Allah, by which He guides whomever He wishes among His servants, and if they had associated partners with Allah, all their efforts would have been in vain.
अल-अनआम : 89 - वे ऐसे लोग है जिन्हें हमने
किताब और निर्णय-शक्ति और पैग़म्बरी प्रदान की थी (उसी प्रकार हमने मुहम्मद को भी
किताब,
निर्णय-शक्ति और पैग़म्बरी दी है) । फिर यदि
ये लोग इसे मारने से इनकार करें, तो अब हमने इसको ऐसे लोगों को
सौंपा है जो इसका इनकार नहीं करते
Al-Anaam: 89 - They are those to whom We gave the Book and the power of judgement and Prophethood (in the same way We gave Muhammad the Book, the power of judgement and Prophethood). So if they deny to kill him, then We have entrusted him to those who do not deny it.
अल-अनआम : 90 - वे (पिछले पैग़म्बर) ऐसे लोग
थे,
जिन्हें अल्लाह ने मार्ग दिखाया था, तो
तुम उन्हीं के मार्ग का अनुसरण करो। कह दो, "मैं तुमसे
उसका कोई प्रतिदान नहीं माँगता। वह तो सम्पूर्ण संसार के लिए बस एक प्रबोध
है।"
Al-Anaam: 90 - They (the previous prophets) were those who were guided by Allah, so follow their path. Say: " I ask no reward from you for it. It is only an instruction for the whole world."
अल-अनआम : 91 - उन्होंने अल्लाह की क़द्र न
जानी,
जैसी उसकी क़द्र जाननी चाहिए थी, जबकि
उन्होंने कहा, "अल्लाह ने किसी मनुष्य पर कुछ
अवतरित ही नहीं किया है।" कहो, "फिर यह
किताब किसने अवतरित की, जो मूसा लोगों के लिए प्रकाश और
मार्गदर्शन के रूप में लाया था, जिसे तुम पन्ना-पन्ना करके रखते
हो?
उन्हें दिखाते भी हो, परन्तु
बहुत-सा छिपा जाते हो। और तुम्हें वह ज्ञान दिया गया, जिसे
न तुम जानते थे और न तुम्हारे बाप-दादा ही।" कह दो, "अल्लाह
ही ने,"
फिर उन्हें छोड़ो कि वे अपनी नुक्ताचीनियों
से खेलते रहें
Al-Anaam: 91 - They did not appreciate Allah as they should have appreciated Him, while they said: " Allah has not revealed anything to any human being." Say: " Then who revealed the Book which Moses brought to the people as light and guidance, which you keep rewritten page by page? You show it to them and conceal much of it. And you were given knowledge that neither you nor your fathers knew." Say: " Allah has revealed it." Then leave them to play with their nitpicking.
अल-अनआम : 92 - यह किताब है जिसे हमने उतारा
है;
बरकतवाली है; अपने
से पहले की पुष्टि में है (ताकि तुम शुभ-सूचना दो) और ताकि तुम केन्द्रीय बस्ती
(मक्का) और उसके चतुर्दिक बसनेवाले लोगों को सचेत करो और जो लोग आख़िरत पर ईमान
रखते है,
वे इसपर भी ईमान लाते है। और वे अपनी नमाज़
की रक्षा करते है
Al-Anaam: 92 - This is the Book which We have sent down, blessed and confirming that which came before it, and so that you may warn the central settlement (Mecca) and those who dwell around it. And those who believe in the Hereafter believe in it, and they guard their prayer.
अल-अनआम : 93 - और उस व्यक्ति से बढ़कर
अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर मिथ्यारोपण करे या
यह कहे कि "मेरी ओर प्रकाशना (वह्य,) की गई है," हालाँकि
उसकी ओर भी प्रकाशना न की गई हो। और वह व्यक्ति से (बढ़कर अत्याचारी कौन होगा) जो
यह कहे कि "मैं भी ऐसी चीज़ उतार दूँगा, जैसी
अल्लाह ने उतारी है।" और यदि तुम देख सकते, तुम
अत्याचारी मृत्यु-यातनाओं में होते है और फ़रिश्ते अपने हाथ बढ़ा रहे होते है कि
"निकालो अपने प्राण! आज तुम्हें अपमानजनक यातना दी जाएगी, क्योंकि
तुम अल्लाह के प्रति झूठ बका करते थे और उसकी आयतों के मुक़ाबले में अकड़ते
थे।"
Al-Anaam: 93 - And who is more unjust than he who accuses Allah of lying or says, "Revelation has been sent down to me," though no revelation has been sent to him? And who is more unjust than he who says, "I will send down such a thing as Allah has sent down." And if you could see, you unjust are in the tortures of death, and the angels are stretching out their hands saying, "Take out your souls! Today you will be punished with a humiliating punishment because you used to lie about Allah and were arrogant in respect of His signs."
अल-अनआम : 94 - और निश्चय ही तुम उसी प्रकार
एक-एक करके हमारे पास आ गए, जिस प्रकार हमने तुम्हें पहली
बार पैदा किया था। और जो कुछ हमने तुम्हें दे रखा था, उसे
अपने पीछे छोड़ आए और हम तुम्हारे साथ तुम्हारे उन सिफ़ारिशियों को भी नहीं देख
रहे हैं,
जिनके विषय में तुम दावे से कहते थे, "वे
तुम्हारे मामले में शरीक है।" तुम्हारे पारस्परिक सम्बन्ध टूट चुके है और वे
सब तुमसे गुम होकर रह गए, जो दावे तुम किया करते थे
Al-Anaam: 94 - And you have certainly come to Us one by one in the same manner as We had created you the first time, leaving behind you that We had given you. And We do not see with you your intercessors about whom you used to claim, " They are partners in your affairs." Your mutual relations have been severed and all that you used to claim has vanished from you.
अल-अनआम : 95 - निश्चय ही अल्लाह दाने और
गुठली को फाड़ निकालता है, सजीव को निर्जीव से निकालता है
और निर्जीव को सजीव से निकालनेवाला है। वही अल्लाह है - फिर तुम कहाँ औंधे हुए
जाते हो?
–
Al-Anaam: 95 - Surely Allah brings out the grain and the kernel, brings out the living from the non-living and brings out the non-living from the living. He is Allah. Then where do you go upside down? –
अल-अनआम : 96 - पौ फाड़ता है, और
उसी ने रात को आराम के लिए बनाया और सूर्य और चन्द्रमा को (समय के) हिसाब का साधन
ठहराया। यह बड़े शक्तिमान, सर्वज्ञ का ठहराया हुआ परिणाम है
Al-Anaam: 96 - He breaks the dawn, and He has made the night as a rest and has appointed the sun and the moon as a means of calculation. This is the result of the Almighty, the All-Wise.
अल-अनआम : 97 - और वही है जिसने तुम्हारे लिए
तारे बनाए, ताकि तुम उनके द्वारा स्थल और
समुद्र के अंधकारों में मार्ग पा सको। जो लोग जानना चाहे उनके लिए हमने निशानियाँ
खोल-खोलकर बयान कर दी है
Al-Anaam: 97 - And He is the One Who has made the stars for you, so that by them you may be guided in the darkness of the land and the sea. We have made the signs clear for those who know.
अल-अनआम : 98 - और वही तो है, जिसने
तुम्हें अकेली जान पैदा किया। अतः एक अवधि तक ठहरना है और फिर सौंप देना है। उन
लोगों के लिए, जो समझे हमने निशानियाँ
खोल-खोलकर बयान कर दी है
Al-Anaam: 98 - And He is the One Who has created you with a single soul. So let it remain for a period and then hand it over. We have explained the signs in detail to those who understand.
अल-अनआम : 99 - और वही है जिसने आकाश से पानी
बरसाया,
फिर हमने उसके द्वारा हर प्रकार की वनस्पति
उगाई;
फिर उससे हमने हरी-भरी पत्तियाँ निकाली और
तने विकसित किए, जिससे हम तले-ऊपर चढे हुए दान
निकालते है - और खजूर के गाभे से झुके पड़ते गुच्छे भी - और अंगूर, ज़ैतून
और अनार के बाग़ लगाए, जो एक-दूसरे से भिन्न भी होते
है। उसके फल को देखा, जब वह फलता है और उसके पकने को
भी देखो! निस्संदेह ईमान लानेवाले लोगों को लिए इनमें बड़ी निशानियाँ है
Al-Anaam: 99 - And He is the One Who sends down water from the sky, then We cause all kinds of vegetation to grow therewith; then We bring forth from it green leaves and stems from which We bring forth grains, hanging down and up, and date-palms with which We bring forth bunches of fruit, and gardens of grapes, olives and pomegranates, each one different from the other. Look at its fruit when it bears fruit, and look at its ripening! Indeed, in this are great signs for those who believe.
अल-अनआम : 100 - और लोगों ने जिन्नों को
अल्लाह का साझी ठहरा रखा है; हालाँकि उन्हें उसी ने पैदा किया
है। और बेजाने-बूझे उनके लिए बेटे और बेटियाँ घड़ ली है। यह उसकी महिमा के
प्रतिकूल है! यह उन बातों से उच्च है, जो वे बयान करते है!
Al-Anaam: 100 - And they associate the jinn with Allah, although He created them, and they have ignorantly created for them sons and daughters. This is contrary to His glory. This is higher than what they describe.
अल-अनआम : 101 - वह आकाशों और धरती का
सर्वप्रथम पैदा करनेवाला है। उसका कोई बेटा कैसे हो सकता है, जबकि
उसकी पत्नी ही नहीं? और उसी ने हर चीज़ को पैदा किया
है और उसे हर चीज़ का ज्ञान है
Al-Anaam: 101 - He is the First Creator of the heavens and the earth. How can He have a son when He has no wife? And He has created everything and He has knowledge of everything.
अल-अनआम : 102 - वही अल्लाह तुम्हारा रब; उसके
सिवा कोई पूज्य नहीं; हर चीज़ का स्रष्टा है; अतः
तुम उसी की बन्दगी करो। वही हर चीज़ का ज़िम्मेदार है
Al-Anaam: 102 - He is Allah, your Lord; there is no one to worship except Him; He is the Creator of everything; so, worship Him. He is responsible for everything
अल-अनआम : 103 - निगाहें उसे नहीं पा सकतीं, बल्कि
वही निगाहों को पा लेता है। वह अत्यन्त सूक्ष्म (एवं सूक्ष्मदर्शी) ख़बर रखनेवाला
है
Al-Anaam: 103 - Sight cannot reach Him, but He reaches the sight. He is the All-Subtle (and All-Miscreant) All-Knowing.
अल-अनआम : 104 - तुम्हारे पास तुम्हारे रब की
ओर से आँख खोल देनेवाले प्रमाण आ चुके है; तो जिस
किसी ने देखा, अपना ही भला किया और जो अंधा बना
रहा,
तो वह अपने ही को हानि पहुँचाएगा। और मैं
तुमपर कोई नियुक्त रखवाला नहीं हूँ
Al-Anaam: 104 - Eye-opening proofs have come to you from your Lord; so, whoever sees, does good to himself and whoever remains blind, harms himself. And I am not a guardian appointed over you.
अल-अनआम : 105 - और इसी प्रकार हम अपनी आयतें
विभिन्न ढंग से बयान करते है (कि वे सुने) और इसलिए कि वे कह लें, "(ऐ
मुहम्मद!) तुमनेकहीं से पढ़-पढ़ा लिया है।" और इसलिए भी कि हम उनके लिए जो
जानना चाहें, सत्य को स्पष्ट कर दें
Al-Anaam: 105 - And thus do We explain Our verses in various ways (that they may listen), and that they may say: “(O Muhammad!) You have recited it from somewhere." And that We may make clear to them the truth of what they wish to know.
अल-अनआम : 106 - तुम्हारे रब की ओर से
तुम्हारी तरफ़ जो वह्यो की गई है, उसी का अनुसरण किए जाओ, उसके
सिवा कोई पूज्य नहीं और बहुदेववादियों (की कुनीति) पर ध्यान न दो
Al-Anaam: 106 - Follow what has been revealed to you from your Lord; there is no god except Him, and do not pay heed to the polytheists.
अल-अनआम : 107 - यदि अल्लाह चाहता तो वे
(उसका) साझी न ठहराते। तुम्हें हमने उनपर कोई नियुक्त संरक्षक तो नहीं बनाया है और
न तुम उनके कोई ज़िम्मेदार ही हो
Al-Anaam: 107 - Had Allah willed, they would not have associated partners with Him. We have not appointed you as a guardian over them, nor are you responsible for them
अल-अनआम : 108 - अल्लाह के सिवा जिन्हें ये
पुकारते है, तुम उनके प्रति अपशब्द का प्रयोग
न करो। ऐसा न हो कि वे हद से आगे बढ़कर अज्ञान वश अल्लाह के प्रति अपशब्द का
प्रयोग करने लगें। इसी प्रकार हमने हर गिरोह के लिए उसके कर्म को सुहावना बना दिया
है। फिर उन्हें अपने रब की ही ओर लौटना है। उस समय वह उन्हें बता देगा. जो कुछ वे
करते रहे होंगे
Al-Anaam: 108 - Do not abuse those whom they call upon besides Allah, lest they cross the limits and abuse Allah out of ignorance. Thus, have We made the deeds of every community beautiful. Then they will return to their Lord. Then He will inform them of what they used to do
अल-अनआम : 109 - वे लोग तो अल्लाह की
कड़ी-कड़ी क़समें खाते है कि यदि उनके पास कोई निशानी आ जाए, तो
उसपर वे अवश्य ईमान लाएँगे। कह दो, "निशानियाँ
तो अल्लाह ही के पास है।" और तुम्हें क्या पता कि जब वे आ जाएँगी तो भी वे
ईमान नहीं लाएँगे
Al-Anaam: 109 - They swear by Allah with great force that if a sign comes to them, they will surely believe in it. Say: " The signs are with Allah." And how do you know that when they come, they will still not believe?
अल-अनआम : 110 - और हम उनके दिलों और निगाहों
को फेर देंगे, जिस प्रकार वे पहली बार ईमान
नहीं लाए थे। और हम उन्हें छोड़ देंगे कि वे अपनी सरकशी में भटकते रहें
Al-Anaam: 110 - And We shall turn their hearts and eyes away from them, just as they had not believed in the first place. And We shall leave them wandering in their rebelliousness.
अल-अनआम : 111 - यदि हम उनकी ओर फ़रिश्ते भी
उतार देते और मुर्दें भी उनसे बातें करने लगते और प्रत्येक चीज़ उनके सामने लाकर
इकट्ठा कर देते, तो भी वे ईमान न लाते, बल्कि
अल्लाह ही का चाहा क्रियान्वित है। परन्तु उनमें से अधिकतर लोग अज्ञानता से काम
लेते है
Al-Anaam: 111 - Even if We had sent down angels to them and the dead had spoken to them and had brought all things together before them, they would still not have believed. But Allah's will be all that works. But most of them are ignorant.
अल-अनआम : 112 - और इसी प्रकार हमने मनुष्यों
और जिन्नों में से शैतानों को प्रत्येक नबी का शत्रु बनाया, जो
चिकनी-चुपड़ी बात एक-दूसरे के मन में डालकर धोखा देते थे - यदि तुम्हारा रब चाहता
तो वे ऐसा न कर सकते। अब छोड़ो उन्हें और उनके मिथ्यारोपण को। -
Al-Anaam: 112 - And thus We made the devils from among men and jinn the enemy of every prophet, who used to deceive one another by whispering flattery into one another's hearts - had your Lord willed, they would not have been able to do that. Now leave them and their false accusations. -
अल-अनआम : 113 - और ताकि जो लोग परलोक को
नहीं मानते, उनके दिल उसकी ओर झुकें और ताकि
वे उसे पसन्द कर लें, और ताकि जो कमाई उन्हें करनी है
कर लें
Al-Anaam: 113 - And so that the hearts of those who do not believe in the Hereafter may incline towards it and so that they may like it, and so that they may earn whatever they want
अल-अनआम : 114 - अब क्या मैं अल्लाह के सिवा
कोई और निर्णायक ढूढूँ? हालाँकि वही है जिसने तुम्हारी
ओर किताब अवतरित की है, जिसमें बातें खोल-खोलकर बता दी
गई है और जिन लोगों को हमने किताब प्रदान की थी, वे
भी जानते है कि यह तुम्हारे रब की ओर से हक़ के साथ अवतरित हुई है, तो
तुम कदापि सन्देह में न पड़ना
Al-Anaam: 114 - Shall I seek any arbiter other than Allah? Although it is He who has revealed the Book to you, explaining it in detail, and those to whom We have given the Book know that it has been revealed from your Lord with the truth, so do not be a doubter.
अल-अनआम : 115 - तुम्हारे रब की बात सच्चाई
और इनसाफ़ के साथ पूरी हुई, कोई नहीं जो उसकी बातों को बदल
सकें,
और वह सुनता, जानता
है
Al-Anaam: 115 - Your Lord's word is true and just. There is no one who can change His words. He is the All-Hearing, the All-Knowing.
अल-अनआम : 116 - और धरती में अधिकतर लोग ऐसे
है,
यदि तुम उनके कहने पर चले तो वे अल्लाह के
मार्ग से तुम्हें भटका देंगे। वे तो केवल अटकल के पीछे चलते है और वे निरे अटकल ही
दौड़ाते है
Al-Anaam: 116 - And most of the people on earth are such that if you follow their advice, they will lead you astray from the path of Allah. They only follow speculations and they spread only speculations.
अल-अनआम : 117 - निस्संदेह तुम्हारा रब उसे
भली-भाँति जानता है, जो उसके मार्ग से भटकता और वह
उन्हें भी जानता है, जो सीधे मार्ग पर है
Al-Anaam: 117 - Surely, your Lord knows best those who stray from His path, and He knows best those who are guided
अल-अनआम : 118 - अतः जिसपर अल्लाह का नाम
लिया गया हो, उसे खाओ; यदि
तुम उसकी आयतों को मानते हो
Al-Anaam: 118 - So eat of that on which Allah's name has been mentioned, if you believe in His verses.
अल-अनआम : 119 - और क्या आपत्ति है कि तुम
उसे न खाओ, जिसपर अल्लाह का नाम लिया गया हो, बल्कि
जो कुछ चीज़े उसने तुम्हारे लिए हराम कर दी है, उनको
उसने विस्तारपूर्वक तुम्हे बता दिया है। यह और बात है कि उसके लिए कभी तुम्हें
विवश होना पड़े। परन्तु अधिकतर लोग तो ज्ञान के बिना केवल अपनी इच्छाओं (ग़लत
विचारों) के द्वारा पथभ्रष्टो करते रहते है। निस्सन्देह तुम्हारा रब मर्यादाहीन
लोगों को भली-भाँति जानता है
Al-Anaam: 119 - And what is the problem with not eating that on which Allah's name has been mentioned? Rather, He has explained to you in detail whatever He has forbidden for you. It is another matter if you are ever compelled to do so. But most people go astray only by their desires (wrong thoughts) without knowledge. Indeed, your Lord is well aware of those who transgress.
अल-अनआम : 120 - छोड़ो खुले गुनाह को भी और
छिपे को भी। निश्चय ही गुनाह कमानेवालों को उसका बदला दिया जाएगा, जिस
कमाई में वे लगे रहे होंगे
Al-Anaam: 120 - Leave open sins as well as hidden sins. Surely those who earn sins will be rewarded for the money they earn.
अल-अनआम : 121 - और उसे न खाओं जिसपर अल्लाह
का नाम न लिया गया हो। निश्चय ही वह तो आज्ञा का उल्लंघन है। शैतान तो अपने
मित्रों के दिलों में डालते है कि वे तुमसे झगड़े। यदि तुमने उनकी बात मान ली तो
निश्चय ही तुम बहुदेववादी होगे
Al-Anaam: 121 - And do not eat that on which Allah's name has not been mentioned. Surely that is a breach of command. Satan puts it into the hearts of his friends to argue with you. If you obey them, then you are certainly polytheists.
अल-अनआम : 122 - क्या वह व्यक्ति जो पहले
मुर्दा था, फिर उसे हमने जीवित किया और उसके
लिए एक प्रकाश उपलब्ध किया जिसको लिए हुए वह लोगों के बीच चलता-फिरता है, उस
व्यक्ति को तरह हो सकता है जो अँधेरों में पड़ा हुआ हो, उससे
कदापि निकलनेवाला न हो? ऐसे ही इनकार करनेवालों के कर्म
उनके लिए सुहाबने बनाए गए है
Al-Anaam: 122 - Can he who was dead and then We gave him life and made a light for him to walk with among the people be like one who lies in darkness and never comes out of it? Thus have the deeds of those who have disbelieved been made beautiful for them?
अल-अनआम : 123 - और इसी प्रकार हमने प्रत्येक
बस्ती में उसके बड़े-बड़े अपराधियों को लगा दिया है कि ले वहाँ चालें चले। वे अपने
ही विरुद्ध चालें चलते है, किन्तु उन्हें इसका एहसास नहीं
Al-Anaam: 123 - And thus We have posted in every town its greatest criminals to plot against it. They plot against themselves but they do not realize it.
अल-अनआम : 124 - और जब उनके पास कोई आयत
(निशानी) आता है, तो वे कहते है, "हम
कदापि नहीं मानेंगे, जब तक कि वैसी ही चीज़ हमें न दी
जाए जो अल्लाह के रसूलों को दी गई हैं।" अल्लाह भली-भाँति उस (के औचित्य) को
जानता है, जिसमें वह अपनी पैग़म्बरी रखता
है। अपराधियों को शीघ्र ही अल्लाह के यहाँ बड़े अपमान और कठोर यातना का सामना करना
पड़ेगा,
उस चाल के कारण जो वे चलते रहे है
Al-Anaam: 124 - And when a sign comes to them, they say, " We will never believe until we are given the same as what Allah's Messengers were given." Allah knows very well the justification in which He holds His Prophethood. The criminals will soon have to face great humiliation and a severe punishment in the presence of Allah because of the way they have been following.
अल-अनआम : 125 - अतः (वास्तविकता यह है कि)
जिसे अल्लाह सीधे मार्ग पर लाना चाहता है, उसका सीना
इस्लाम के लिए खोल देता है। और जिसे गुमराही में पड़ा रहने देता चाहता है, उसके
सीने को तंग और भिंचा हुआ कर देता है; मानो वह आकाश में चढ़ रहा है। इस
तरह अल्लाह उन लोगों पर गन्दगी डाल देता है, जो ईमान
नहीं लाते
Al-Anaam: 125 - So whomever Allah wishes to guide, He opens his heart for Islam. And whomever He wishes to keep astray, He makes his heart narrow and constricted as if he were climbing into the sky. Thus, Allah pours filth on those who do not believe.
अल-अनआम : 126 - और यह तुम्हारे रब का रास्ता
है,
बिल्कुल सीधा। हमने निशानियाँ, ध्यान
देनेवालों के लिए खोल-खोलकर बयान कर दी है
Al-Anaam: 126 - And this is the way of your Lord, straight. We have made the signs clear for those who pay attention.
अल-अनआम : 127 - उनके लिए उनके रब के यहाँ
सलामती का घर है और वह उनका संरक्षक मित्र है, उन
कामों के कारण जो वे करते रहे है
Al-Anaam: 127 - For them is a safe abode with their Lord, and He is their protector and friend because of what they do.
अल-अनआम : 128 - और उस दिन को याद करो, जब
वह उन सबको घेरकर इकट्ठा करेगा, (कहेगा), "ऐ
जिन्नों के गिरोह! तुमने तो मनुष्यों पर ख़ूब हाथ साफ किया।" और मनुष्यों में
से जो उनके साथी रहे होंगे, कहेंग, "ऐ
हमारे रब! हमने आपस में एक-दूसरे से लाभ उठाया और अपने उस नियत समय को पहुँच गए, जो
तूने हमारे लिए ठहराया था।" वह कहेगा, "आग (नरक)
तुम्हारा ठिकाना है, उसमें तुम्हें सदैव रहना
है।" अल्लाह का चाहा ही क्रियान्वित है। निश्चय ही तुम्हारा रब तत्वदर्शी, सर्वज्ञ
है
Al-Anaam: 128 - And remember the Day when He will gather them all together and say: " O community of Jinn! You have done great harm to mankind." And those among mankind who were their companions will say: " Our Lord! We have benefited one another and have reached the appointed time which You had appointed for us." He will say: " The Fire is your abode; therein you will abide forever." Only the will of Allah works. Surely your Lord is Wise, Omniscient.
अल-अनआम : 129 - इसी प्रकार हम अत्याचारियों
को एक-दूसरे के लिए (नरक का) साथी बना देंगे, उस कमाई के
कारण जो वे करते रहे थे
Al-Anaam: 129 - Thus shall We make the unjust people partners with one another, because of what they used to earn
अल-अनआम : 130 - "ऐ जिन्नों और मनुष्यों
के गिरोह! क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे, जो
तुम्हें मेरी आयतें सुनाते और इस दिन के पेश आने से तुम्हें डराते थे?" वे
कहेंगे,
"क्यों नहीं! (रसूल तो आए थे) हम स्वयं अपने
विरुद्ध गवाह है।" उन्हें तो सांसारिक जीवन ने धोखे में रखा। मगर अब वे स्वयं
अपने विरुद्ध गवाही देने लगे कि वे इनकार करनेवाले थे
Al-Anaam: 130 - "O Jinn and mankind! Did not Messengers come to you from among yourselves, reciting My verses to you and warning you of the coming of this Day?" They will say, " Why not! We are witnesses against ourselves." They were deceived by the worldly life. But now they themselves have become witnesses against themselves that they were disbelievers.
अल-अनआम : 131 - यह जान लो कि तुम्हारा रब
ज़ुल्म करके बस्तियों को विनष्ट करनेवाला न था, जबकि
उनके निवासी बेसुध रहे हों
Al-Anaam: 131 - Know that your Lord was not going to destroy towns unjustly while their inhabitants were unaware.
अल-अनआम : 132 - सभी के दर्जें उनके कर्मों
के अनुसार है। और जो कुछ वे करते है, उससे तुम्हारा रब अनभिज्ञ नहीं
है
Al-Anaam: 132 - Everyone's rank is according to their deeds. And your Lord is not unaware of what they do
अल-अनआम : 133 - तुम्हारा रब निस्पृह, दयावान
है। यदि वह चाहे तो तुम्हें (दुनिया से) ले जाए और तुम्हारे स्थान पर जिसको चाहे
तुम्हारे बाद ले आए, जिस प्रकार उसने तुम्हें कुछ और
लोगों की सन्तति से उठाया है
Al-Anaam: 133 - Your Lord is Self-Reliant, Merciful. If He wishes, He can take you (from this world) and bring in your place whomever He wishes after you, just as He has raised you from the progeny of some others.
अल-अनआम : 134 - जिस चीज़ का तुमसे वादा किया
जाता है,
उसे अवश्य आना है और तुममें उसे मात करने की
सामर्थ्य नहीं
Al-Anaam: 134 - What you are promised will surely come, and you have no power to prevent it
अल-अनआम : 135 - कह दो, "ऐ
मेरी क़ौम के लोगो! तुम अपनी जगह कर्म करते रहो, मैं
भी अपनी जगह कर्मशील हूँ। शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि घर (लोक-परलोक) का
परिणाम किसके हित में होता है। निश्चय ही अत्याचारी सफल नहीं होते।"
Al-Anaam: 135 - Say: " O my people! Keep doing your duty, I too am doing my duty. You will soon know in whose favour the outcome of the home (this world and the next) is. Indeed, the oppressors do not succeed."
अल-अनआम : 136 - उन्होंने अल्लाह के लिए
स्वयं उसी की पैदा की हुई खेती और चौपायों में से एक भाग निश्चित किया है और अपने
ख़याल से कहते है, "यह किस्सा अल्लाह का है और यह
हमारे ठहराए हुए साझीदारों का है।" फिर जो उनके साझीदारों का (हिस्सा) है, वह
अल्लाह को नहीं पहुँचता, परन्तु जो अल्लाह का है, वह
उनके साझीदारों को पहुँच जाता है। कितना बुरा है, जो
फ़ैसला वे करते है!
Al-Anaam: 136 - They have allotted to Allah a portion from the crops and animals that He has produced, and they say according to their own thinking, " This is the portion of Allah and this is the portion of our partners." But what belongs to their partners does not reach Allah, but what belongs to Allah reaches their partners. How evil is the judgment they make!
अल-अनआम : 137 - इसी प्रकार बहुत-से बहुदेववादियों
के लिए उनके लिए साझीदारों ने उनकी अपनी सन्तान की हत्या को सुहाना बना दिया है, ताकि
उन्हें विनष्ट कर दें और उनके लिए उनके धर्म को संदिग्ध बना दें। यदि अल्लाह चाहता
तो वे ऐसा न करते; तो छोड़ दो उन्हें और उनके झूठ
घड़ने को
Al-Anaam: 137 - Similarly, for many of the polytheists, their partners have made it pleasant to kill their own children, in order to destroy them and make their religion doubtful for them. Had Allah willed, they would not have done that; so, leave them and their fabrications of lies.
अल-अनआम : 138 - और वे कहते है, "ये
जानवर और खेती वर्जित और सुरक्षित है। इन्हें तो केवल वही खा सकता है, जिसे
हम चाहें।" - ऐसा वे स्वयं अपने ख़याल से कहते है - और कुछ चौपाए ऐसे है, जिनकी
पीठों को (सवारी के लिए) हराम ठहरा लिया है और कुछ जानवर ऐसे है जिनपर अल्लाह का
नाम नहीं लेते। यह यह उन्होंने अल्लाह पर झूठ घड़ा है, और
वह शीघ्र ही उन्हें उनके झूठ घड़ने का बदला देगा
Al-Anaam: 138 - And they say: " These animals and crops are forbidden and forbidden. Only those whom we wish may eat them. " - They say so according to their own thinking - and there are some animals whose backs have been forbidden (for riding), and there are some animals on which the name of Allah is not mentioned. They have fabricated lies against Allah, and He will soon repay them for their fabrication.
अल-अनआम : 139 - और वे कहते है, "जो
कुछ इन जानवरों के पेट में है वह बिल्कुल हमारे पुरुषों ही के लिए है और वह हमारी
पत्नियों के लिए वर्जित है। परन्तु यदि वह मुर्दा हो, तो
वे सब उसमें शरीक है।" शीघ्र ही वह उन्हें उनके ऐसा कहने का बदला देगा।
निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
Al-Anaam: 139 - And they say, " Whatever is in the belly of these animals is exclusively for our men and it is forbidden for our wives. But if it is dead, they are all partners in it." Soon He will reward them for their saying so. Surely, He is Wise, All-Wise.
अल-अनआम : 140 - वे लोग कुछ जाने-बूझे बिना
घाटे में रहे, जिन्होंने मूर्खता के कारण अपनी
सन्तान की हत्या की और जो कुछ अल्लाह ने उन्हें प्रदान किया था, उसे
अल्लाह पर झूठ घड़कर हराम ठहरा दिया। वास्तव में वे भटक गए और वे सीधा मार्ग
पानेवाले न हुए
Al-Anaam: 140 - Those who kill their own children out of stupidity and make forbidden what Allah had bestowed upon them by fabricating lies against Allah are losers without knowing it. They have indeed gone astray and are not guided.
अल-अनआम : 141 - और वही है जिसने बाग़ पैदा
किए;
कुछ जालियों पर चढ़ाए जाते है और कुछ नहीं
चढ़ाए जाते और खजूर और खेती भी जिनकी पैदावार विभिन्न प्रकार की होती है, और
ज़ैतून और अनार जो एक-दूसरे से मिलते-जुलते भी है और नहीं भी मिलते है। जब वह फल
दे,
तो उसका फल खाओ और उसका हक़ अदा करो जो उस
(फ़सल) की कटाई के दिन वाजिब होता है। और हद से आगे न बढ़ो, क्योंकि
वह हद से आगे बढ़नेवालों को पसन्द नहीं करता
Al-Anaam: 141 - And He is the One Who has brought forth the gardens, some of which are raised on trellises and some which are not, and the date palms and the crops of which their produce is diverse, and the olives and the pomegranates which are similar and do not resemble each other. When they bear fruit, eat of them and pay the dues on the day of harvest. And do not transgress the limits, for He does not like those who transgress.
अल-अनआम : 142 - और चौपायों में से कुछ बोझ
उठानेवाले बड़े और कुछ छोटे जानवर पैदा किए। अल्लाह ने जो कुछ तुम्हें दिया है, उसमें
से खाओ और शैतान के क़दमों पर न चलो। निश्चय ही वह तुम्हारा खुला हुआ शत्रु है
Al-Anaam: 142 - And from the cattle He created some large beasts of burden and some small. Eat of what Allah has provided for you and do not follow the footsteps of Satan. Surely, he is your open enemy.
अल-अनआम : 143 - आठ नर-मादा पैदा किए - दो
भेड़ की जाति से और दो बकरी की जाति से - कहो, "क्या
उसने दोनों नर हराम किए है या दोनों मादा को? या उसको जो
इन दोनों मादा के पेट में हो? किसी ज्ञान के आधार पर मुझे बताओ, यदि
तुम सच्चे हो।"
Al-Anaam: 143 - He has produced eight males and eight females - two from the species of sheep and two from the species of goat. Say: " Has He made the two males or the two females unlawful? Or what is in the wombs of the two females? Tell me by some knowledge, if you are truthful."
अल-अनआम : 144 - और दो ऊँट की जाति से और दो
गाय की जाति से, कहो, "क्या
उसने दोनों नर हराम किए है या दोनों मादा को? या उसको जो
इन दोनों मादा के पेट में हो? या, तुम
उपस्थित थे, जब अल्लाह ने तुम्हें इसका आदेश
दिया था?
फिर उस व्यक्ति से बढ़कर अत्याचारी कौन होगा
जो लोगों को पथभ्रष्ट करने के लिए अज्ञानता-पूर्वक अल्लाह पर झूठ घड़े? निश्चय
ही,
अल्लाह अत्याचारी लोगों को मार्ग नहीं
दिखाता।"
Al-Anaam: 144 - And say to the two kinds of camels and the two kinds of cows: "Has He forbidden the two males or the two females? Or what is in the wombs of the two females? Or were you present when Allah commanded you? Then who is more unjust than he who fabricates a lie against Allah unknowingly to lead the people astray? Surely Allah does not guide the unjust."
अल-अनआम : 145 - कह दो, "जो
कुछ मेरी ओर प्रकाशना की गई है, उसमें तो मैं नहीं पाता कि किसी
खानेवाले पर उसका कोई खाना हराम किया गया हो, सिवाय इसके
लिए वह मुरदार हो, यह बहता हुआ रक्त हो या ,सुअर
का मांस हो - कि वह निश्चय ही नापाक है - या वह चीज़ जो मर्यादा से हटी हुई हो, जिसपर
अल्लाह के अतिरिक्त किसी और का नाम लिया गया हो। इसपर भी जो बहुत विवश और लाचार हो
जाए;
परन्तु वह अवज्ञाकारी न हो और न हद से आगे
बढ़नेवाला हो, तो निश्चय ही तुम्हारा रब
अत्यन्त क्षमाशील, दयाबान है।"
Al-Anaam: 145 - Say: " In all that has been revealed to me, I do not find that any food has been forbidden to any eater except for a dead body, or blood, or the flesh of a swine - for this is certainly impure - or that which transgresses the limits, on which the name of other than Allah has been mentioned. And if, nevertheless, he becomes constrained and helpless, but he is not disobedient or transgresses the limits, then surely your Lord is Most Forgiving, Most Merciful."
अल-अनआम : 146 - और उन लोगों के लिए जो यहूदी
हुए हमने नाख़ूनवाला जानवर हराम किया और गाय और बकरी में से इन दोनों की चरबियाँ
उनके लिए हराम कर दी थीं, सिवाय उस (चर्बी) के जो उन दोनों
की पीठों या आँखों से लगी हुई या हड़्डी से मिली हुई हो। यह बात ध्यान में रखो।
हमने उन्हें उनकी सरकशी का बदला दिया था और निश्चय ही हम सच्चे है
Al-Anaam: 146 - And for those who were Jews, we made forbidden any animal having nails and the fat of the cow and the goat, except that which is on their backs or near the eyes or near the bones. Remember this. We recompensed them for their transgression, and certainly, we are truthful.
अल-अनआम : 147 - फिर यदि वे तुम्हें झुठलाएँ
तो कह दो, "तुम्हारा रब व्यापक दयालुतावाला
है और अपराधियों से उसकी यातना नहीं फिरती।"
Al-Anaam: 147 - Then if they deny you, say: " Your Lord is All-Merciful, and His punishment does not avert from the sinners."
अल-अनआम : 148 - बहुदेववादी कहेंगे, "यदि
अल्लाह चाहता तो न हम साझीदार ठहराते और न हमारे पूर्वज ही; और
न हम किसी चीज़ को (बिना अल्लाह के आदेश के) हराम ठहराते।" ऐसे ही उनसे पहले
के लोगों ने भी झुठलाया था, यहाँ तक की उन्हें हमारी यातना
का मज़ा चखना पड़ा। कहो, "क्या तुम्हारे पास कोई ज्ञान है
कि उसे हमारे पास पेश करो? तुम लोग केवल गुमान पर चलते हो
और निरे अटकल से काम लेते हो।"
Al-Anaam: 148 - The polytheists will say: " Had Allah willed, we would not have associated partners, nor our forefathers; nor would we have forbidden anything (except by Allah's command). So also, those before them denied, until they had to taste Our punishment. Say: " Do you have any knowledge that you can present to us? You only follow assumption and speculate."
अल-अनआम : 149 - कह दो, "पूर्ण
तर्क तो अल्लाह ही का है। अतः यदि वह चाहता तो तुम सबको सीधा मार्ग दिखा
देता।"
Al-Anaam: 149 - Say: " The perfect judgment belongs to Allah. Had He willed, He would have guided you all to the straight path."
अल-अनआम : 150 - कह दो, "अपने
उन गवाहों को लाओ, जो इसकी गवाही दें कि अल्लाह ने
इसे हराम किया है।" फिर यदि वे गवाही दें तो तुम उनके साथ गवाही न देना, औऱ
उन लोगों की इच्छाओं का अनुसरण न करना जिन्होंने हमारी आयतों को झुठलाया और जो
आख़िरत को नहीं मानते और (जिनका) हाल यह है कि वे दूसरो को अपने रब के समकक्ष
ठहराते है
Al-Anaam: 150 - Say: " Bring your witnesses who testify that Allah has forbidden this." And if they testify, do not testify with them. And do not follow the desires of those who have rejected Our signs and who do not believe in the Hereafter and who take others as equals to their Lord.
अल-अनआम : 151 - कह दो, "आओ, मैं
तुम्हें सुनाऊँ कि तुम्हारे रब ने तुम्हारे ऊपर क्या पाबन्दियाँ लगाई है: यह कि
किसी चीज़ को उसका साझीदार न ठहराओ और माँ-बाप के साथ सद्व्य वहार करो और निर्धनता
के कारण अपनी सन्तान की हत्या न करो; हम तुम्हें भी रोज़ी देते है और
उन्हें भी। और अश्लील बातों के निकट न जाओ, चाहे वे
खुली हुई हों या छिपी हुई हो। और किसी जीव की, जिसे
अल्लाह ने आदरणीय ठहराया है, हत्या न करो। यह और बात है कि
हक़ के लिए ऐसा करना पड़े। ये बाते है, जिनकी ताकीद उसने तुम्हें की है, शायद
कि तुम बुद्धि से काम लो।
Al-Anaam: 151 - Say: " Come! I will recite to you what your Lord has commanded you: Do not associate anything with God, and be good to your parents, and do not kill your children because of poverty. We provide sustenance for you and for them. And do not go near obscene things, whether they are open or hidden. And do not kill any being that Allah has honored. It is another matter if you have to do it for the sake of truth. These are the things He has commanded you, so that you may use your wisdom.
अल-अनआम : 152 - "और अनाथ के धन को हाथ
न लगाओ,
किन्तु ऐसे तरीक़े से जो उत्तम हो, यहाँ
तक कि वह अपनी युवावस्था को पहुँच जाए। और इनसाफ़ के साथ पूरा-पूरा नापो और तौलो।
हम किसी व्यक्ति पर उसी काम की ज़िम्मेदारी का बोझ डालते हैं जो उसकी सामर्थ्य में
हो। और जब बात कहो, तो न्याय की कहो, चाहे
मामला अपने नातेदार ही का क्यों न हो, और अल्लाह की प्रतिज्ञा को पूरा
करो। ये बातें हैं, जिनकी उसने तुम्हें ताकीद की है।
आशा है तुम ध्यान रखोगे
Al-Anaam: 152 - "And do not touch the wealth of an orphan, except in the best way, until he reaches his prime. And measure and weigh with justice. We only entrust to a person what he is able to do. And when you speak, speak in justice, even if it be against one of your own kin. And fulfill the covenant of Allah. These are the things which He has commanded you. We hope you will pay attention to them.
अल-अनआम : 153 - और यह कि यही मेरा सीधा
मार्ग है, तो तुम इसी पर चलो और दूसरे
मार्गों पर न चलो कि वे तुम्हें उसके मार्ग से हटाकर इधर-उधर कर देंगे। यह वह बात
है जिसकी उसने तुम्हें ताकीद की है, ताकि तुम (पथभ्रष्ट ता से) बचो
Al-Anaam: 153 - And this is My straight path, so follow it and do not follow other paths because they will make you stray from His path. This is what He has cautioned you to guard yourself against.
अल-अनआम : 154 - फिर (देखो) हमने मूसा को
किताब दी थी, (धर्म को) पूर्णता प्रदान करने के
लिए,
जिसे उसने उत्तम रीति से ग्रहण किया था; और
हर चीज़ को स्पष्ट रूप से बयान करने, मार्गदर्शन देने और दया करने के
लिए,
ताकि वे लोग अपने रब से मिलने पर ईमान लाएँ
Al-Anaam: 154 - Then (behold) We gave Moses the Book, perfecting it, which he had received in the best manner; and clarifying everything, and guidance and a mercy, that they may believe in the meeting of their Lord.
अल-अनआम : 155 - और यह किताब भी हमने उतारी
है,
जो बरकतवाली है; तो
तुम इसका अनुसरण करो और डर रखो, ताकि तुमपर दया की जाए,
Al-Anaam: 155 - And We have sent down this Book, full of blessings; so, follow it and fear it, that you may receive mercy,
अल-अनआम : 156 - कि कहीं ऐसा न हो कि तुम कहने
लगो,
"किताब तो केवल हमसे पहले के दो गिरोहों पर
उतारी गई थी और हमें तो उनके पढ़ने-पढ़ाने की ख़बर तक न थी।"
Al-Anaam: 156 - Lest you say: " The Book was revealed only to two groups before us and we were not even aware of their reading and teaching."
अल-अनआम : 157 - या यह कहने लगो, "यदि
हमपर किताब उतारी गई होती तो हम उनसे बढकर सीधे मार्ग पर होते।" तो अब
तुम्हारे पास रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण, मार्गदर्शन
और दयालुता आ चुकी है। अब उससे बढ़कर अत्याचारी कौन होगा जो अल्लाह की आयतों को
झुठलाए और दूसरों को उनसे फेरे? जो लोग हमारी आयतों से रोकते हैं, उन्हें
हम इस रोकने के कारण जल्द बुरी यातना देंगे
Al-Anaam: 157 - Or say, " If the Book had been revealed to us, we would have been more guided than them." So now there has come to you clear proof from God, guidance and mercy. Who is more unjust than he who rejects the verses of God and turns others away from them? We will soon punish with a terrible chastisement those who forbid Our verses.
अल-अनआम : 158 - क्या ये लोग केवल इसी की
प्रतीक्षा कर रहे है कि उनके पास फ़रिश्ते आ जाएँ या स्वयं तुम्हारा रब की कोई
निशानी आ जाएगी, फिर किसी ऐसे व्यक्ति को उसका
ईमान कुछ लाभ न पहुँचाएगा जो पहले ईमान न लाया हो या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई
न कमाई हो। कह दो, "तुम भी प्रतीक्षा करो, हम
भी प्रतीक्षा करते है।"
Al-Anaam: 158 - Are they waiting only for the angels to come to them or for a sign from your Lord to come to them? Then faith will not benefit a person who has not believed before or who has not earned any good in his faith. Say: " You wait, we also wait."
अल-अनआम : 159 - जिन लोगों ने अपने धर्म के
टुकड़े-टुकड़े कर दिए और स्वयं गिरोहों में बँट गए, तुम्हारा
उनसे कोई सम्बन्ध नहीं। उनका मामला तो बस अल्लाह के हवाले है। फिर वह उन्हें बता
देगा जो कुछ वे किया करते थे
Al-Anaam: 159 - Those who have divided their religion into parts and have divided themselves into sects, you have nothing to do with them. Their matter is with Allah. Then He will tell them what they used to do.
अल-अनआम : 160 - जो कोई अच्छा चरित्र लेकर
आएगा उसे उसका दस गुना बदला मिलेगा और जो व्यक्ति बुरा चरित्र लेकर आएगा, उसे
उसका बस उतना ही बदला मिलेगा, उनके साथ कोई अन्याय न होगा
Al-Anaam: 160 - Whoever brings good character will be rewarded ten times as much and whoever brings bad character will be rewarded only as much, no injustice will be done to them
अल-अनआम : 161 - कहो, "मेरे
रब ने मुझे सीधा मार्ग दिखा दिया है, बिल्कुल ठीक धर्म, इबराहीम
के पंथ की ओर जो सबसे कटकर एक (अल्लाह) का हो गया था और वह बहुदेववादियों में से न
था।"
Al-Anaam: 161. Say: " My Lord has guided me to the straight path, the right religion, the faith of Abraham who had deviated from all and was not of the polytheists."
अल-अनआम : 162 - कहो, "मेरी
नमाज़ और मेरी क़ुरबानी और मेरा जीना और मेरा मरना सब अल्लाह के लिए है, जो
सारे संसार का रब है
Al-Anaam: 162 - Say: " My prayer and my sacrifice, my life and my death are all for Allah, the Lord of the Worlds
अल-अनआम : 163 - "उसका कोई साझी नहीं
है। मुझे तो इसी का आदेश मिला है और सबसे पहला मुस्लिम (आज्ञाकारी) मैं हूँ।"
Al-Anaam: 163 - "He has no partner. Only He has been commanded by me and I am the first Muslim (to obey)."
अल-अनआम : 164 - कहो, "क्या
मैं अल्लाह से भिन्न कोई और रब ढूढूँ, जबकि हर चीज़ का रब वही
है!" और यह कि प्रत्येक व्यक्ति जो कुछ कमाता है, उसका
फल वही भोगेगा; कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का
बोझ नहीं उठाएगा। फिर तुम्हें अपने रब की ओर लौटकर जाना है। उस समय वह तुम्हें बता
देगा,
जिसमें परस्पर तुम्हारा मतभेद और झगड़ा था
Al-Anaam: 164 - Say: " Shall I seek a lord other than Allah, when He is the Lord of all things?" And that every soul shall enjoy the fruit of whatever it earns; no burden-bearer shall bear another's burden. Then you shall return to your Lord. Then He will tell you about that in which you disputed and disputed.
अल-अनआम : 165 - वही है जिसने तुम्हें धरती
में धरती में ख़लीफ़ा (अधिकारी, उत्ताराधिकारी) बनाया और तुममें
से कुछ लोगों के दर्जे कुछ लोगों की अपेक्षा ऊँचे रखे, ताकि
जो कुछ उसने तुमको दिया है उसमें वह तम्हारी ले। निस्संदेह तुम्हारा रब जल्द सज़ा
देनेवाला है। और निश्चय ही वही बड़ा क्षमाशील, दयावान
है
Al-Anaam: 165 - It is He Who has made you Caliphs in the earth and has elevated some of you above others, so that He may have a share in what He has bestowed upon you. Your Lord is swift in punishment. And He is most Forgiving, most Merciful.
👇Read More👇
5.Surat-ul-Maeeda | अल-माइदा. 👈
6.Surat-Ul-Anaam | अल-अनआम
👉Free Download Hindi OR Urdu Voice Quran👈
0 Comments